India LPG Shortage: मिडिल ईस्ट में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव का असर सबसे पहले ऊर्जा बाजार पर पड़ता है और यही स्थिति इस बार भी देखने को मिल रही है। ईरान-इजरायल संघर्ष के कारण खाड़ी क्षेत्र में असुरक्षा बढ़ गई है और इसका सीधा असर तेल और गैस के समुद्री व्यापार पर पड़ा है। खासकर होर्मुज स्ट्रेट, जिसे दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल-गैस मार्गों में से एक माना जाता है, वहां जहाजों की आवाजाही लगभग ठप पड़ गई है। यह वही रास्ता है जिससे होकर दुनिया के बड़े हिस्से में कच्चा तेल और LNG पहुंचता है। भारत जैसे देश, जो अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है, इस स्थिति से सीधे प्रभावित होते हैं। इसी वजह से अब भारतीय घरेलू गैस सप्लाई चेन में भी दबाव दिखने लगा है।
क्यों बढ़ा भारत में LPG संकट
भारत दुनिया के सबसे बड़े ऊर्जा आयातकों में से एक है। देश की ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा खाड़ी देशों से पूरा होता है। आंकड़ों के अनुसार भारत हर दिन करीब 25 से 27 लाख बैरल कच्चा तेल सऊदी अरब, इराक, कतर और UAE से खरीदता है। इतना ही नहीं, देश की करीब 55% LPG और लगभग 30% LNG सप्लाई भी इन्हीं देशों से आती है। जब होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों की आवाजाही बाधित हुई तो इसका असर तुरंत सप्लाई पर पड़ा। परिणामस्वरूप LPG की उपलब्धता कम हुई और बाजार में कीमतों पर दबाव बढ़ गया। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर यह स्थिति लंबे समय तक बनी रहती है तो भारत जैसे देशों के लिए ऊर्जा प्रबंधन और भी बड़ी चुनौती बन सकता है।
देशभर में दिखने लगा गैस सिलेंडर संकट
कई राज्यों से खबरें आ रही हैं कि घरेलू गैस सिलेंडर की डिलीवरी में देरी हो रही है। कई जगहों पर लोगों को लंबा इंतजार करना पड़ रहा है। कुछ शहरों में गैस एजेंसियों के बाहर लंबी कतारें भी देखी जा रही हैं। कई उपभोक्ताओं का कहना है कि सिलेंडर बुक करने के बाद भी उन्हें समय पर डिलीवरी नहीं मिल रही है। हालांकि सरकार और तेल कंपनियों का कहना है कि यह स्थिति अस्थायी है और जल्द ही सप्लाई को सामान्य करने की कोशिश की जा रही है।
सरकार एक्शन मोड में
संकट को देखते हुए केंद्र सरकार ने तुरंत ऊर्जा सुरक्षा और घरेलू गैस सप्लाई को स्थिर रखने के लिए कई बड़े फैसले लिए हैं। इन कदमों का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि आम लोगों को गैस की कमी का सामना न करना पड़े। सरकार ने तेल कंपनियों और रिफाइनरियों को निर्देश दिए हैं कि वे उत्पादन और वितरण दोनों स्तरों पर तेजी से काम करें ताकि संकट को जल्द नियंत्रित किया जा सके।
रिफाइनरियों को उत्पादन बढ़ाने का आदेश
सरकार ने देश की सभी सरकारी और निजी रिफाइनरियों को आदेश दिया है कि वे LPG उत्पादन क्षमता को अधिकतम स्तर तक बढ़ाएं। इसका उद्देश्य घरेलू बाजार में गैस की उपलब्धता बढ़ाना है ताकि सप्लाई में किसी तरह की कमी न आए। ऊर्जा विशेषज्ञों का कहना है कि घरेलू उत्पादन बढ़ाने से कुछ हद तक आयात पर निर्भरता कम हो सकती है।
जमाखोरी रोकने के लिए बुकिंग नियम बदले
संकट के समय अक्सर पैनिक बुकिंग और जमाखोरी की समस्या बढ़ जाती है। इसे रोकने के लिए सरकार ने गैस सिलेंडर की बुकिंग अंतराल अवधि बढ़ा दी है। पहले जहां उपभोक्ता 21 दिन के बाद नया सिलेंडर बुक कर सकते थे, अब इसे बढ़ाकर 25 दिन कर दिया गया है। सरकार का मानना है कि इससे अनावश्यक बुकिंग और जमाखोरी पर नियंत्रण लगेगा और गैस की उपलब्धता बेहतर तरीके से प्रबंधित की जा सकेगी।
घरेलू जरूरतों को दी गई प्राथमिकता
सरकार ने साफ किया है कि इस संकट में घरेलू उपभोक्ताओं की जरूरतें सबसे ऊपर रहेंगी। इसके साथ ही PNG और वाहनों के लिए CNG की सप्लाई भी जारी रखने की कोशिश की जा रही है। अस्पतालों, स्कूलों और अन्य जरूरी संस्थानों को भी प्राथमिकता सूची में रखा गया है ताकि उनकी सेवाएं प्रभावित न हों।
कमर्शियल सिलेंडर पर बनी विशेष समिति
19 किलो वाले कमर्शियल LPG सिलेंडर, जिन्हें आम तौर पर होटल और रेस्तरां में इस्तेमाल किया जाता है, उनकी सप्लाई में भी कमी देखी गई है। इस समस्या से निपटने के लिए सरकार ने Oil Marketing Companies (OMCs) की एक विशेष समिति बनाई है। यह समिति कमर्शियल गैस की सप्लाई की निगरानी करेगी और जरूरत पड़ने पर तुरंत कदम उठाएगी।
अतिरिक्त LPG केवल सरकारी कंपनियों को
सरकार ने निर्देश दिया है कि अतिरिक्त उत्पादित LPG गैस केवल IOCL, BPCL और HPCL जैसी सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों को दी जाएगी। इस कदम का उद्देश्य सप्लाई चेन को स्थिर बनाए रखना और बाजार में किसी तरह की कमी से बचना है।
कालाबाजारी पर सख्त कार्रवाई
संकट के समय अक्सर गैस सिलेंडर की कालाबाजारी बढ़ जाती है। इसे रोकने के लिए सरकार ने कड़ा रुख अपनाया है। देशभर में छापेमारी, जब्ती और लाइसेंस कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। जरूरत पड़ने पर ESMA (Essential Services Maintenance Act) भी लागू किया जा सकता है।
भारत ने बदले आयात के रास्ते (Alternative Oil Import Routes)
होर्मुज मार्ग बाधित होने के बाद भारत ने तुरंत वैकल्पिक आयात मार्गों और नए सप्लायर देशों की तलाश शुरू कर दी। सरकार ने कई देशों के साथ नए ऊर्जा समझौते किए हैं ताकि सप्लाई में कमी न आए।
रूस बना बड़ा आपूर्तिकर्ता
हाल के दिनों में भारत ने रूस से तेल खरीद काफी बढ़ा दी है। मार्च के शुरुआती दिनों में रूस से तेल खरीद में लगभग 50% की बढ़ोतरी दर्ज की गई है और आयात बढ़कर 15 लाख बैरल प्रतिदिन तक पहुंच गया है। सरकारी कंपनी IOC और निजी कंपनी Reliance ने रूस से करीब 3 करोड़ बैरल तेल खरीदने के सौदे किए हैं।
अमेरिका से LNG की बड़ी डील
भारत ने अमेरिका से LNG खरीद के लिए भी बड़े समझौते किए हैं। सरकारी कंपनी GAIL ने अमेरिका से गैस आयात बढ़ाने के लिए नए करार किए हैं ताकि सप्लाई में आई कमी को पूरा किया जा सके।
लैटिन अमेरिका और अफ्रीका से नई खरीद
ऊर्जा स्रोतों में विविधता लाने के लिए भारत ने लैटिन अमेरिका और अफ्रीका की ओर भी रुख किया है। भारत ने पहली बार गुयाना से लगभग 40 लाख बैरल तेल खरीदा है। इसके अलावा नाइजीरिया और अंगोला से भी अतिरिक्त खेप मंगाई जा रही है।
LPG और LNG के नए स्रोत सक्रिय
सरकार ने अल्जीरिया, नॉर्वे और कनाडा जैसे देशों के साथ LPG और LNG सप्लाई के नए समझौते सक्रिय किए हैं। इस समय दो बड़े LNG कार्गो भारत की ओर रवाना हो चुके हैं, जो आने वाले दिनों में सप्लाई को स्थिर करने में मदद करेंगे।
70% तेल आयात अब वैकल्पिक मार्गों से
पहले भारत अपने कुल तेल आयात का लगभग 55% हिस्सा ही वैकल्पिक मार्गों से लाता था। अब इसे बढ़ाकर करीब 70% कर दिया गया है ताकि मिडिल ईस्ट पर निर्भरता कम हो सके।
होटल-रेस्तरां कारोबार पर असर
कमर्शियल LPG की कमी का सबसे बड़ा असर होटल और रेस्तरां उद्योग पर पड़ा है। बेंगलुरु, मुंबई और कोलकाता जैसे बड़े शहरों में 19 किलो वाले कमर्शियल सिलेंडर की भारी कमी देखी जा रही है। कुछ रेस्तरां ने अपना मेन्यू छोटा कर दिया है, जबकि कई छोटे ढाबों और रेस्टोरेंट्स ने गैस न मिलने के कारण अस्थायी रूप से किचन बंद कर दिए हैं।
क्या LPG कीमतें और बढ़ेंगी?
सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या आने वाले समय में LPG सिलेंडर की कीमतें और बढ़ेंगी। सरकारी सूत्रों का कहना है कि फिलहाल पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी की संभावना नहीं है। LPG में हाल ही में हुई बढ़ोतरी के बाद फिलहाल बड़ी कीमत वृद्धि की संभावना कम बताई जा रही है, हालांकि स्थिति पूरी तरह अंतरराष्ट्रीय बाजार पर निर्भर करेगी।
सरकार का दावा: गैस की कमी नहीं होने देंगे
सरकार का कहना है कि मिडिल ईस्ट संकट के बावजूद भारत की ऊर्जा सुरक्षा को बनाए रखने के लिए तेजी से कदम उठाए गए हैं। उत्पादन बढ़ाने से लेकर नए देशों से आयात और कालाबाजारी रोकने तक कई स्तरों पर काम किया जा रहा है। हालात चुनौतीपूर्ण जरूर हैं, लेकिन सरकार का दावा है कि घरेलू उपभोक्ताओं को गैस की कमी नहीं होने दी जाएगी।






